सेवानिवृत्त नायब तहसीलदार को सजा

ऊना। विशेष सत्र न्यायाधीश रतन सिंह की अदालत ने निष्क्रांत संपत्ति को बेचने और तबादला करने के मामले में एक सेवानिवृत्त नायब तहसीलदार सेल्स को दोषी करार देते हुए दो केसों में विभिन्न धाराओं के तहत 2 वर्ष का कठोर कारावास और 30 हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने की सूरत में दोषी को छह महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।
लोक अभियोजक चंद्रशेखर भाटिया ने बताया कि वर्ष 2002 में अंब में नायब तहसीलदार सेल्स कम रजिस्ट्रार के पद पर तैनात जमीत सिंह ने निष्क्रांत संपत्ति के संदर्भ में नायब तहसीलदार सेटलमेंट रमेश चौधरी के साथ मिलकर सेल्स सर्टिफिकेट जारी करवा लिया। बाद में इस संपत्ति का इंतकाल भी हो गया था। तहसीलदार रमेश चौधरी का उस समय निधन हो गया था, जब पुलिस ने इस मामले से संबधित चालान कोर्ट में पेश किया। भाटिया ने इस केस की पैरवी की और मामले में दोषियों के खिलाफ 32 गवाह कोर्ट में पेश हुए।
भाटिया ने बताया कि वली मोहम्मद नामक व्यक्ति के नाम से जारी किए गए इस लैटर को दर्ज करने के साथ इसका इंतकाल भी दर्ज कर लिया गया। बाद में किसी ने इसकी शिकायत विजिलेंस एंड एंटी क्रप्शन ब्यूरो से की। विजिलेंस ने शिकायत के आधार पर इसकी जांच की तो शिकायत को सही पाया गया। विजिलेंस ने निष्क्रांत संपत्ति की खरीद और ट्रांसफर के आरोप में जमीत सिंह और रमेश चौधरी के खिलाफ दो केस दर्ज किए। बुधवार को अदालत ने दोनों केसों में जमीत सिंह को दोषी करार देते हुए विभिन्न धाराओं के तहत दो वर्ष कठोर कारावास और तीस हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने की सूरत में दोषी को तीन माह का साधारण कारावास भुगतना होगा। भादसं की धारा 420 में जमीत सिंह के खिलाफ दो वर्ष कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने तथा भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13, 2 के तहत एक वर्ष कठोर कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है।

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